मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा के विपक्ष के नेता अजीत पवार ने अपने छत्रपति शिवाजी को लेकर दिए गए बयान के लिए माफी मांगने से मना कर दिया है। दरअसल, अजीत पवार ने कहा था कि छत्रपति संभाजी महाराज 'धर्मवीर' नहीं बल्कि 'स्वराज्य रक्षक' हैं।
भाजपा ने जताया विरोध
विपक्ष के नेता अजीत पवार ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी मेरे खिलाफ तो विरोध प्रदर्शन कर रही है लेकिन वहीं, जब महाराष्ट्र के राज्यपाल और अन्य नेता किसी महान व्यक्ति का अपमान करते हैं तो भाजपा चुप रहती है। उन्होंने आगे कहा कि 'धर्मवीर' शब्द का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है, इसलिए छत्रपति संभाजी महाराज को 'स्वराज्य रक्षक' के रूप में संबोधित किया जाना चाहिए।
पदनाम के तौर पर इस्तेमाल होता है 'धर्मवीर'
पवार ने आगे कहा, "अगर आप 'धर्मवीर' शब्द को गूगल करते हैं तो पाएंगे कि ऐसे बहुत से लोग हैं जो इसको अपने पदनाम के लिए इस्तेमाल करते हैं। लेकिन छत्रपति संभाजी महाराज एक ही हैं, तो मैनें अगर उन्हें 'स्वराज्य रक्षक' कहा है तो वो सही है और मैं अपने बयान पर कायम रहुंगा।"
उन्होंने कहा कि फिल्में 'धर्मवीर' के नाम से रिलीज होती हैं और अब खबरों के मुताबिक 'धर्मवीर 2' रिलीज होगी, तो आजकल 'धर्मवीर' शब्द का प्रयोग सभी करते हैं। "छत्रपति संभाजी महाराज एक 'स्वराज्य रक्षक' हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज ने हिंदवी स्वराज्य पाया और शिवाजी महाराज के बाद संभाजी महाराज ने इसे जारी रखा।
"उन्हें 'धर्मवीर' कहना गलत"
नागपुर में हाल ही में संपन्न महाराष्ट्र राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र में, एक बहस के दौरान, एनसीपी के वरिष्ठ नेता और एलओपी अजीत पवार ने कहा, "हम हमेशा छत्रपति संभाजी महाराज को 'स्वराज्य रक्षक' के रूप में संदर्भित करते हैं। लेकिन कुछ लोग उन्हें 'धर्मवीर' (धर्म का संरक्षक) कह रहे हैं। उन्हें 'धर्मवीर' कहना गलत है, संभाजी महाराज ने कभी किसी विशेष धर्म का समर्थन नहीं किया, उनका त्याग और कार्य राष्ट्रीय और समावेशी कल्याण के लिए था।
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