सूर्यकुमार यादव का आज हर कोई दीवाना है. टीम इंडिया जब भी मुश्किल में होती है सूर्या का बल्ला जरूर चलता है. सूर्यकुमार के पास ऐसे शॉट्स हैं जिन्हें थामना फिलहाल किसी गेंदबाज के बस की बात नहीं लग रही. टी20 वर्ल्ड कप 2022 इसका सबसे बड़ा सबूत है. सूर्यकुमार यादव ने इस टूर्नामेंट में 75 की औसत से 225 रन बनाए हैं. उनके बल्ले से 3 अर्धशतक निकल चुके हैं और उनका स्ट्राइक रेट 190 से ज्यादा का है. आज सूर्या को उनकी बल्लेबाजी के लिए सलाम किया जा रहा है लेकिन ये इज्जत उन्होंने काफी दुख-दर्द झेलकर कमाई है.
सूर्यकुमार यादव के जीवन में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिसके बाद अच्छा-अच्छा खिलाड़ी टूट जाता है. सूर्यकुमार यादव के साथ साल 2014 में कुछ ऐसा हुआ था जिसके बाद उनका नाम गलत वजहों से सुर्खियों में था. आइए आपको बताते हैं सूर्यकुमार को बदल देने वाली कहानी.
जब सूर्यकुमार ने ड्रेसिंग रूम का शीशा फोड़ा था
13 मार्च, 2014 का दिन था और सूर्यकुमार यादव बीपीसीएल के लिए एक टी20 मैच खेल रहे थे. उस कॉर्पोरेट ट्रॉफी के मुकाबले में सूर्यकुमार यादव जल्दी आउट हो गए और इसके बाद इस खिलाड़ी ने गुस्से में आकर ड्रेसिंग रूम का शीशा फोड़ दिया. सूर्यकुमार यादव ने शीशे पर बैट मारा और इसके बाद उन्हें मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के सामने पेश होना पड़ा.
सूर्यकुमार की गई कप्तानी
सूर्यकुमार यादव के करियर में बुरा दौर अभी शुरू ही हुआ था. इसके बाद सूर्यकुमार यादव की एक रणजी मैच के दौरान अपनी ही टीम के खिलाड़ी शार्दुल ठाकुर से बहस हो गई. दोनों बीच मैदान पर एक-दूसरे पर भड़कते दिखे. झगड़े और लड़ाई की रिपोर्ट के बाद सूर्यकुमार यादव से तीनों फॉर्मेट की कप्तानी छीन ली गई. यही नहीं सूर्यकुमार को बीच रणजी ट्रॉफी से भी बाहर कर दिया. उस वक्त मुंबई के कोच रहे चंद्रकांत पंडित ने कहा कि उस वक्त सूर्यकुमार यादव काफी हतोत्साहित नजर आते थे. उनका ध्यान खेल पर नहीं था. लेकिन फिर सूर्यकुमार यादव ने वो किया जो हर किसी के बस की बात नहीं.
कैसे बदले सूर्यकुमार यादव?
एक से बाद एक बड़े झटके लगने के बाद कोई भी खिलाड़ी टूट जाता है लेकिन सूर्यकुमार यादव मजबूत हुए. इस खिलाड़ी ने अपनी सोच, जीवनशैली, ट्रेनिंग सबकुछ बदल डाला. रिपोर्ट्स के मुताबिक सूर्यकुमार यादव ने सबसे पहले ध्यान लगाना शुरू किया. पहले मेडिटेशन को सूर्यकुमार ज्यादा तवज्जो नहीं देते थे लेकिन अपनी बेहतरी के लिए उन्होंने इसे आजमाया और इसका फायदा उन्हें हर मैच में दिखने लगा.
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