'सावरकर का अपमान' करने पर सीएम शिंदे ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, कहा- 'महाराष्ट्र नहीं सहेगा'

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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने राहुल गांधी पर निशाना साधा और कहा कि महाराष्ट्र की जनता वीर सावरकर का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगी। दरअसल सावरकर स्मारक पर हिंदुत्व पर आयोजित संगोष्ठी में महाराष्ट्र के सीएम राहुल गांधी द्वारा हिंदुत्व विचारक के खिलाफ बार-बार की गई टिप्पणियों का जिक्र कर रहे थे, जिसमें कहा गया था कि 'उन्होंने अंडमान में जेल जाने पर अंग्रेजों के लिए दया याचिकाएं लिखीं और अंग्रेजों के लिए और कांग्रेस के खिलाफ भी काम किया।'


उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए, सीएम शिंदे ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर का अपमान किया गया था, उनके पूर्ववर्ती उद्धव ठाकरे ने मौन रखा और नरम रुख अपनाया। उसी कार्यक्रम में पार्टी में आंतरिक विद्रोह के बाद एकनाथ शिंदे में शामिल हुए सांसद राहुल शेवाले ने कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा को रोकने की मांग की। बता दें कि भारत जोड़ो यात्रा वर्तमान में महाराष्ट्र में चल रही है। उन्होंने आगे ये भी कहा कि कांग्रेस पार्टी के मन में महाराष्ट्र के श्रद्धेय वीडी सावरकर के लिए कोई सम्मान नहीं है।


शिंदे ने शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे की 10वीं पुण्यतिथि की पूर्व संध्या पर आयोजित संगोष्ठी में कहा, "राज्य के लोग सावरकर का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे।"


वीर सावरकर के आलोचकों के खिलाफ नरम रवैया अपनाया जा रहा है और उन्हें 'माफीवीर' के रूप में नामित किया जा रहा है, सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा, "सावरकर का अक्सर अपमान किया जाता है। उन्हों माफ़ीवीर के रूप में संबोधित किया जाता है। हम देख रहे हैं कि उनके [सावरकर का अपमान करने वालों]  खिलाफ नरम रुख अपनाया जा रहा है।"


15 नवंबर, मंगलवार को वाशिम में अपनी यात्रा के एक हिस्से के रूप में एक रैली को संबोधित करते हुए गांधी ने कहा कि सावरकर ने अंग्रेजों को दया याचिकाएं लिखीं, "उन्हें दो-तीन साल के लिए अंडमान में जेल में रखा गया था। उन्होंने दया याचिकाएं लिखना शुरू कर दिया था, "कांग्रेस सांसद ने आगे टिप्पणी करते हुए कहा था," वह अंग्रेजों से पेंशन लेते थे, उनके लिए काम करते थे और कांग्रेस के खिलाफ काम करते थे।


सीएम एकनाथ सीएम ने उद्धव ठाकरे का जिक्र करते हुए कहा कि देवेंद्र फडणवीस ने विपक्ष के नेता (नवंबर 2019-जून 2022) के रूप में सावरकर को सम्मानित करने के लिए विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया था, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री (उद्धव ठाकरे) और अध्यक्ष ने तर्क दिया था ऐसा कदम सदन के नियमों में फिट नहीं होता।

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