ईरान में हिजाब के विरोध (Iran Hijab Row) में जारी प्रदर्शन अब भारत तक पहुंच गया है, ईरानी मूल अभिनेत्री ने मुंबई में अकेले खड़े होकर प्रदर्शन किया। अभिनेत्री मंदाना करीमी (Mandana Karimi) काले कपड़े पहनकर ईरान में जारी प्रदर्शन को अपना समर्थन देते हुए मुंबई की सड़कों पर हाथों में तख्ती लेकर खड़ी दिखाई दी। थोड़ी ही देर में कई अन्य लोग भी उनके प्रदर्शन में शामिल हो गए।
बता दें कि ईरान मूल की स्वीडिश सांसद ने हाल ही में ईरान में जारी प्रदर्शन को समर्थन देते हुए यूरोपीय संसद में बहस के दौरान अपने बाल काट दिए। इसके अगले ही दिन मंदाना करीमी ने भी मुंबई की सड़कों पर उतरकर ईरानी महिलाओं का समर्थन किया। गौरतलब है कि किसी भी बॉलीवुड स्टार ने अभी तक हिजाब विवाद पर कुछ नहीं बोला है, जबकि भारत में भी हिजाब को लेकर विवाद चल रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार मंदाना करीमी पर इस प्रदर्शन को लेकर दबाव डाला जा रहा है, जिसके बाद उन्होंने अपने प्रदर्शन का 17 मिनट लंबा वीडियो पोस्ट करने के बाद अपने सोशल मीडिया अकाउंट को प्राइवेट कर दिया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बॉलीवुड अभिनेताओं ने अलग-अलग कारणों का हवाला देते हुए उनके प्रदर्शन को समर्थन देने से मना कर दिया।
बता दें कि ईरान की मॉरल पुलिस (पूर्व में गश्त-ए-इरशाद) के हिरासत में महसा अमिनी की मौत के बाद देश में हिजाब के विरोध में भारी प्रदर्शन शुरू हो गया। उग्र महिलाओं को ईरान की सड़कों पर बाल काटते और हिजाब जलाते हुए देखा गया। ईरान की सड़कों पर एकजुट हुईं महिलाएं अपने मूल अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ रही हैं।
ईरान क्रांति के साल 1979 से, ईरान में हिजाब ना पहनना एक दंडनीय अपराध है। यह अनिवार्य ड्रेस कोड न कि केवल ईरानी मुसलमानों पर बल्कि सभी राष्ट्रीयताओं और धर्मों पर लागू होता है। देश में सभी महिलाओं को अपने बालों और गर्दन को स्कार्फ से छुपाने का नियम है। कई मौकों पर, महिलाओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और सार्वजनिक स्थानों पर इस कानून का विरोध किया है।
ईरान की आधिकारिक मॉरल पुलिस की हिरासत में महसा अमिनी की मौत
महसा अमिनी अपने परिवार के साथ तेहरान गई थी, जब उसे मॉरल पुलिस ने हिरासत में लिया। स्थानीय मीडिया के अनुसार, थोड़ी देर बाद, उसे दिल का दौरा पड़ा और उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, अमिनी के परिवार ने कहा कि गिरफ्तारी से पहले वह सामान्य थी और दिल की कोई बीमारी नहीं थी।
समाचार एजेंसी ने बताया कि, "महसा की दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई और उसके शव को मेडिकल जांच के लिए भेज दिया गया।" इसके एक दिन बाद तेहरान पुलिस ने घोषणा की कि महसा अमिनी को अन्य महिलाओं के साथ हिजाब के नियमों का उल्लंघन करने के कारण हिरासत में लिया गया था।
अमिनी के परिवार से बात करने वाली एक मानवाधिकार कार्यकर्ता ने कहा कि "पुलिस ने 22 वर्षीय महसा को पुलिस वैन के अंदर जबरदस्ती बैठाया। उसके भाई कियाराश ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उसे रोक लिया और बताया कि उसकी बहन को एक घंटे की पूछताछ के लिए ले जाया जा रहा है। अपनी बहन की रिहाई का पुलिस स्टेशन के बाहर इंतजार करते हुए कियाराश ने देखा कि उसकी बहन को एम्बुलेंस में अस्पताल ले जाया जा रहा है।"
22 वर्षीय महिला की मौत के बाद, इस्लामी देश में "मॉरल पुलिस" के खिलाफ एक बहस छिड़ गई और इस मुद्दे की वैश्विक स्तर पर चर्चा हो रही है। पीड़िता के अंतिम संस्कार के दौरान, कुछ प्रदर्शनकारी नारे लगाते हुए गवर्नर हाउस के बाहर जमा हो गए। जिसमें ईरानी पुलिस को प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागने पड़े। ईरान सरकार और पुलिस ने कहा कि विरोध में कोई घायल नहीं हुआ, वहीं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों के गंभीर रूप से घायल होने के कई वीडियो सामने आए। इस बीच, ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी ने गृह मंत्री को मामले की जांच शुरू करने का आदेश दिया है।
