Mumbai: अहमदाबाद-मुंबई हाईस्पीड रेल प्रोजेक्ट को फास्ट ट्रैक करेगी शिंदे सरकार, लेकिन बाधाएं तब भी रहेंगी

hindmata mirror
0

मुंबई: महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी की भागीदार वाली नई सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट अहमदाबाद-मुंबई हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के काम में तेजी आने की उम्मीद है. महाराष्ट्र सरकार का राज्य में करीब 150 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण पर फोकस होगा. इसके साथ ही नई सरकार राज्य में पहले से अधिग्रहीत जमीन पर भी काम शुरू करने के लिए केंद्र के साथ सामंजस्य स्थापित करेगी. इस प्रोजेक्ट के गुजरात में पड़ने वाले 352 किलोमीटर के खंड के साथ-साथ दादरा और नगर हवेली वाले खंड पर भी काम शुरू हो गया है.


अहमदाबाद-मुंबई हाई स्पीड रेल कॉरिडोर प्रोजेक्ट से जुड़े एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने News18 से कहा, ‘2019 के बाद से उद्धव ठाकरे सरकार के रवैये के कारण परियोजना की समय सीमा 2023 से बढ़ाकर 2026 के अंत तक करनी पड़ी. इस तरह यह प्रोजेक्ट 3 साल पीछे चला गया. रुकावटें इतनी अधिक पैदा की गईं कि प्रधानमंत्री ने आखिरी बार निर्देश दिया था कि बिना महाराष्ट्र का इंतजार किए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को पहले गुजरात में चालू किया जाए. अब, हमें उम्मीद है कि पूरे खंड पर काम तेजी से होगा.’ नवंबर 2020 में ‘प्रगति’ समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने उद्धव ठाकरे सरकार से 30 अप्रैल, 2021 तक इस परियोजना के लिए महाराष्ट्र में आवश्यक भूमि का अधिग्रहण करने और सौंपने के लिए कहा था. लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ.


अहमदाबाद-मुंबई हाई स्पीड रेल कॉरिडोर प्रोजेक्ट महाराष्ट्र में लेट

ठाकरे सरकार ने परियोजना को ‘दंभ’ करार दिया था और कहा था कि यह उसकी प्राथमिकता नहीं है. मुंबई और अहमदाबाद के बीच पहले से ही अच्छी रेल कनेक्टिविटी है, इस तरह का हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर वास्तव में मुंबई और नागपुर के बीच अधिक फायदेमंद होगा. इससे महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण में देरी हुई. प्रोजेक्ट को कुछ इस तरह समझें: कुल परियोजना के लिए 1,396 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है, जिसमें से लगभग 298 हेक्टेयर महाराष्ट्र में है. गुजरात (954 हेक्टेयर) और दादरा एंड नगर हवेली (8 हेक्टेयर) में आवश्यक शेष भूमि पिछले साल अधिग्रहित कर ली गई है. स्टेशन के डिजाइन सहित पूरे खंड पर काम शुरू हो गया है. महाराष्ट्र में प्रक्रिया थम गई है.


इस साल अप्रैल तक, महाराष्ट्र में आवश्यक 298 हेक्टेयर में से केवल 150 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया था. तत्कालीन देवेंद्र फडणवीस सरकार द्वारा 2018 में प्रगति समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री को आश्वासन दिया गया था कि परियोजना के लिए आवश्यक पूरी भूमि 2019 तक अधिग्रहित कर ली जाएगी. लेकिन 2019 में महाराष्ट्र में सरकार बदल गई. पिछले अगस्त में, केंद्र ने संसद को बताया कि परियोजना को पूरा करने के लिए उसके पास कोई संशोधित समय सीमा नहीं थी और महाराष्ट्र सरकार पर अत्यधिक देरी का आरोप लगाया. सरकार ने संसद को सूचित किया था, ‘महाराष्ट्र में पूरी भूमि के अधिग्रहण के बाद ही परियोजना को पूरा करने के लिए संशोधित समय सीमा तय की जा सकती है.’


पालघर में जमीन अधिग्रहण परियोजना की राह में सबसे बड़ा रोड़ा

परियोजना का लगभग 108 किलोमीटर का स्ट्रेच पालघर से होकर गुजरता है, जहां भूमि अधिग्रहण के लिए गांवों में काफी जन प्रतिरोध है. नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) ने पिछले साल ‘पालघर जिले के लिए संचार प्रबंधन और भूमि अधिग्रहण में सुविधा’ के लिए एक एजेंसी या सलाहकार नियुक्त करने का फैसला किया, जहां नौ गांव परियोजना के लिए अपनी जमीन देने का विरोध कर रहे हैं. एजेंसी परियोजना के विवरण और सरकार की ओर से हितधारकों को मिलने वाले लाभ के बारे में जानकारी देगी.


NHSRCL को हितधारकों की चिंताओं या प्रतिक्रियाओं से अवगत कराएगी. एजेंसी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण में विभिन्न गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने में NHSRCL और महाराष्ट्र सरकार की भी सहायता करेगी. दस्तावेज में कहा गया है कि इसमें 9 गांवों में ग्राम सभाओं की सहमति लेना शामिल होगा, जिन्हें ‘परियोजना के बारे में अवगत कराने और इसके साथ सहमति जताने के लिए लगातार राजी और आश्वस्त किया जाना है’. सभी 9 गांव पंचायत विस्तार से अनुसूचित क्षेत्र अधिनियम के अंतर्गत आते हैं.

Tags

Post a Comment

0Comments
Post a Comment (0)
6/grid1/Featured