जितेंद्र आव्हाड (Jitendra Awhad) के खिलाफ छेड़छाड़ का केस (Molestation Case) दर्ज होने के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (CM Eknath Shinde) ने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पुलिस मामले की जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई करेगी। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने आश्वासन दिया कि पुलिस पर कोई राजनीतिक दबाव नहीं है।
इससे पहले NCP प्रवक्ता महेश तापसे ने दावा किया था कि एकनाथ शिंदे सरकार आव्हाड की आवाज दबाने के लिए झूठे मामले में फंसाने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा उन्होंने तर्क दिया कि जितेंद्र आव्हाड पर धारा 354 के तहत आरोप नहीं लगाया जा सकता है।
जितेंद्र अवध के खिलाफ FIR
जितेंद्र आव्हाड पर छेड़छाड़ का आरोप मुंब्रा में एक नए पुल का उद्धाटन कार्यक्रम के दौरान लगा। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वह एकनाथ शिंदे से मिलने के लिए उनकी गाड़ी के पास जा रही थी, उसी दौरान आव्हाड उनके रास्ते में आ गए। आव्हाड ने कहा कि “तुम बीच में क्यों खड़ी हो? एक तरफ हटो।” उसके बाद उन्होंने कंधा पकड़ कर एक तरफ धकेल दिया। बाद में वह शिंदे से मिली और जितेंद्र आव्हाड के खिलाफ FIR दर्ज कराने की बात कही। इसके बाद पुलिस ने धारा 354 के तहत केस दर्ज किया।
शिकायतकर्ता ने मीडिया को बताया कि “वाई जंक्शन पर नए पुल का उद्घाटन होने वाला था। हम सभी शाम 4 बजे ही पहुंच गए क्योंकि हमें पता था कि देवेंद्र जी और सीएम आ रहे हैं। उद्घाटन अच्छी तरह से हुआ। जब सीएम जा रहे थे, मैंने सोचा उनसे मिल लूं। वहां बहुत भीड़ थी इसलिए मैं एक तरफ से जा गाड़ी के पास जा रही थी। तभी वहां विधायक साहब आए। उन्होंने मुझे पकड़ लिया और एक तरफ धकेल दिया। उन्होंने मेरा अपमान किया। मैंने इसके खिलाफ आवाज उठाई है। इसलिए मैंने पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत दर्ज कराई।”
इसके बाद आव्हाड ने अपने खिलाफ दर्ज कथित 'फर्जी' मामलों के विरोध में एक विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने ठाणे की एक अदालत में छेड़छाड़ के मामले में अग्रिम जनानत की अर्जी दायर की। अतिरिक्त सत्र अदालत के जज पीएम गुप्ता ने पुलिस को एनसीपी विधायक को उनकी अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई होने तक गिरफ्तार नहीं करने का निर्देश दिया। आईपीसी की धारा 354 में जेल की सजा का प्रावधान है जो दो साल तक या जुर्माना या दोनों के साथ हो सकता है।
