सिद्धार्थनगर: माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कालेज में फर्जी आधार कार्ड पर नेपाल निवासी ने प्रोफेसर की नौकरी हथियाने का प्रयास किया। मामला खुलता देख उसने किनारा कस लिया है। फिलहाल नेपाल निवासी राजकीय मेडिकल कालेज आजमगढ़ के एनाटामी विभाग में संविदा पर एसोसिएट प्रोफेसर पद पर कार्यरत है। शासन स्तर पर इस मामले की जांच शुरू हो गई है। इस प्रकरण का एक आरटीआई में पर्दाफाश हुआ है। यह आधार कार्ड महाराष्ट्र से बनवाया गया है। यह मामला मेडिकल कालेज के एनाटामी (शारीरिक संरचना) विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति से जुड़ा है।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कालेज के एनाटामी विभाग का है प्रकरण
वर्ष 2021 में मेडिकल कालेज ने एनाटामी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर पर नियुक्ति से संबंधित विज्ञापन प्रकाशित किया था। इसमें दो अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। डा. हशमतुल्लाह व आजमगढ़ मेडिकल कालेज में संविदा पर सह आचार्य पद पर कार्यरत डा. किशोर भंडारी ने आवेदन किया था। फार्म के साथ आधार कार्ड भी लगाया। साक्षात्कार के बाद अभी तक सूची नहीं निकाली गई है। इसी के बाद शासन में नेपाल निवासी नागरिक होने का आरोप लगा। राजकीय मेडिकल कालेज आजमगढ़ के प्राचार्य ने अपने उत्तर में कहा है कि भारत-नेपाल संधि के अनुसार वहां के निवासी को प्रशासनिक सेवा को छोड़कर अन्य सरकारी नौकरी दी जा सकती है। शासकीय पत्र में इनका पता वार्ड नंबर 26, पोखरा नेपाल दर्ज है।
नेपाल निवासी ने महाराष्ट्र से किया एनाटामी में पीएचडी
नेपाल निवासी किशोर भंडारी ने वर्ष 2012 में महाराष्ट्र से एनाटामी में एमएससी किया था। वर्ष 2015 में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद तीन वर्ष तक एक निजी मेडिकल कालेज के एनाटामी विभाग में प्रवक्ता के रूप में कार्य किया। आजमगढ़ के राजकीय मेडिकल कालेज में वर्ष 2019 में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था।
हाईकोर्ट ने भी दिया नेपाल निवासी की नियुक्ति पर फैसला
वर्ष 2017 में उच्च न्यायालय इलाहाबाद (प्रयागराज) के न्यायाधीश बी अमित सेठालेकर ने नेपाल निवासी राजकुमारी की रिट याचिका पर फैसला सुनाया था। राजकुमारी ने कहा था कि भारतीय मूल के शिक्षक पति की मृत्यु के पश्चात उन्हें अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी का लाभ मिलना चाहिए। न्यायाधीश ने निर्णय सुनाते हुए कहा था कि वास्तविक भारतीय (नेचुरल सिटीजन) व भारतीय नागरिकता ग्रहण करने वालों को सरकारी नौकरी में प्रवेश पर कड़ाई से रोक लगाया जाए। एक ऐसा व्यक्ति जो भारतीय नागरिक नहीं है, वह सरकारी नौकरी का लाभ कदापि नहीं प्राप्त कर सकता है।
एनाटामी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर पद की नियुक्ति के लिए अभ्यर्थियों का साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। प्रपत्रों की जांच करना कार्यालय का काम है। शासन स्तर पर मामले की शिकायत हुई है। जांच चल रही है। - प्रो. डा. वेदप्रकाश, विभागाध्यक्ष एनाटामी विभाग।
एनाटामी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति की प्रक्रिया मेरे कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व का है। शिकायत की जांच शासन स्तर से चल रही है। आधार कार्ड व्यक्तिगत पहचान पत्र है। नेपाल निवासी ने कैसे इसे बनवाया, यह जांच का विषय है।
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