मुंबई: महाराष्ट्र के भिवंडी जिले में स्थित दुगड़ गांव में सरकारी मुआवजे के 90 लाख हड़पने के लिए 73 साल की एक आदिवासी महिला के साथ धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। जालसाजों ने पैसे अपने नाम करने के लिए महिला का परिचय बदलकर उसके अनुरूप फर्जी दस्तावेज तैयार किए। किस्सा एक जमीन से जुड़ा हुआ है, जो पीड़ित महिला की है। सरकार ने मुंबई-वडोदरा के बीच राजमार्ग निर्माण कार्य के लिए इसे अधिग्रहित किया था।
एसडीओ ऑफिस से नोटिस आने पर हुआ सच का खुलासा
पीड़िता भागीरथि रमा मुकने को अपने साथ हुए धोखे के बारे में तब पता चला जब उन्हें अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) की ओर से नोटिस आया जिसमें उनसे 32 लाख रुपये वापस करने को कहा गया। मालूम हो कि महिला को इस पूरे घोटाले में उनके रिश्तेदारों ने जालसाजों के साथ मिलीभगत कर फंसाया।
बेटी और पोते ने दी जालसाजों को मदद
जालसाजों को पता लगा था कि सरकार ने ठाकी साख्य सावर की 1,500 स्क्वॉयर मीटर की दो जमीनों का अधिग्रहण किया है। सावर का साल 2011 में निधन हो गया और वह अपने पीछे जमीन को लेकर मुआवजे का दावा करने के लिए किसी को नहीं छोड़ गया है। जालसाजों ने मौके का फायदा उठाते हुए भागीरथी को अपना शिकार बनाया। उन्होंने भागीरथी के नाम का फर्जी आधार कार्ड वगैरह बनवाने के लिए उनकी बेटी बेबी और पोते भूषण अशोक नंदविस्कर की मदद ली। इससे भागीरथी के अंगूठे का छाप वगैरह मिलना आसान हो गया।
जमीन के मालिक की पहले ही हो चुकी है मौत
महाराष्ट्र में आदिवासियों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले श्रमजीवी संगठन से जुड़े कार्यकर्ता जयेंद्र गोविंद गावित ने कहा, जमीन के असली मालिक सावर की 15 अप्रैल, 2011 में मौत हो गई है। धोखेबाजों ने भागीरथी के करीबी रिश्तेदारों को जमीन को लेकर पैसे का दावा करने के लिए उनका इस्तेमाल करने का लालच दिया। जाली दस्तावेज बनाने के बाद उन्होंने एक हलफनामा बनाया और पिछले साल जुलाई में भागीरथी को सावर के रूप में पेश कर बैंक में एक खाता खुलवाया।
एसडीओ ऑफिस ने अकाउंट में भेजे 90 लाख रुपये
हलफनामे पर भागीरथी के पोते नंदविस्कर के हस्ताक्षर हैं। उन्होंने कहा, पिछले साल जुलाई में भिवंडी एसडीओ के कार्यालय में भी इसी हलफनामे को पेश किया गया था।
गावित ने कहा, हैरानी की बात यह है कि 27 जुलाई, 2021 को तलाथी प्रिया सोनवणे ने एक प्रमाण पत्र जारी कर कहा कि ठाकी साख्य सावर के स्वामित्व वाली भूमि का कोई कर 2020-21 की अवधि के लिए लंबित नहीं रहा।
एक दशक पहले सावर के निधन के बावजूद ऐसा होता रहा। तलाथी द्वारा जारी प्रमाण पत्र एसडीओ कार्यालय में भेजा गया, जिससे 90 लाख रुपये भूमि मुआवजे के रूप में देने की बात आगे बढ़ी।
तदनुसार, एसडीओ कार्यालय की तरफ से 06 अगस्त, 2021 में सावर के नाम से खोले गए भागीरथी के बैंक खाते में 58 लाख रुपये भेज दिए गए और बाकी बचे हुए पैसे बाद में एक दूसरे अकाउंट में डाल दिए गए। इसके बाद जालसाजों ने पूरे के पूरे 90 लाख खातों में से निकाल लिए।
एसडीओ ऑफिस को हुआ अपनी इस गलती का एहसास
इसके कुछ दिनों बाद एसडीओ कार्यालय ने गौर फरमाया कि सावर को तय राशि से अधिक भेजा गया है, अब चूंकि सावर के नाम से बनाए फर्जी आधार कार्ड पर पता भागीरथी का ही था तो अधिकारियों ने उसी पते पर संपर्क किया। एसडीओ बालासाहेब वाकचाउरे ने भागीरथि के पते पर तीन नोटिस भेजे और कहा कि जितने पैसे ज्यादा भेजे गए हैं उन्हें वापस कर दो।
पोते किरन ने बताई दादी को पूरी सच्चाई
भागीरथी पढ़ी-लिखी नहीं है। उन्होंने अपने एक और पोते किरन सुनीत मुक्ने को इसके बारे में बताया। उसने देखा कि भागीरथी को सरकार 32 लाख अतिरिक्त भेजे गए रुपये लौटाने को कह रही है। फिर किरन ने अधिकारियों को बताया कि यह जमीन मेरी दादी की है ही नहीं।
किसी ने भूमि मुआवजे के नाम पर सरकार से पैसे निकालने के लिए मेरी दादी को बरगलाया है। उनकी तस्वीर और अन्य चीजों जैसे अंगूठे के निशान वगैरह का इस्तेमाल ठाकी साख्य सावर के नाम से दस्तावेज बनाने के लिए किया है।
मुख्यमंत्री तक पहुंची बात
मिली जानकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र में आदिवासी विकास समीक्षा समिति के अध्यक्ष विवेक पंडित ने बताया है कि इस बारे में मुख्यमंत्री को भी जानकारी दे दी गई है। उन्होंने ठाणे के कलेक्टर को तुरंत इसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाइ करने का निर्देश दिया है।
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